Friday, 6 April 2018

वक्त ने हर अंदाज़ बदल के रख दिया

वक्त हर अंदाज़ बदल के चल दिया 
न ख़ुशी से ख़ुशी न ज़ख्मों ने दर्द दिया 

न दोस्तों से उम्मीद न दुश्मनों से गिला
ज़िन्दगी का हिसाब कुछ तो कर दिया

ज़िंदगी से कब तक लड़ते जायेंगे 
हार मान इस किस्से को बदल दिया

चाहत अब ज़िन्दगी में बहार न लाएगी 
उम्मीद का हर फूल हमने मसल दिया  

सोचते हैं अहसास न कुछ बोल जाये
डर से कलम का सर ही कुचल दिया 

कुछ बातों का असर जाता नहीं 
लफ्जों ने हौसलों को क़तर दिया 

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