वक्त हर अंदाज़ बदल के चल दिया
न ख़ुशी से ख़ुशी न ज़ख्मों ने दर्द दिया
न दोस्तों से उम्मीद न दुश्मनों से गिला
ज़िन्दगी का हिसाब कुछ तो कर दिया
ज़िंदगी से कब तक लड़ते जायेंगे
हार मान इस किस्से को बदल दिया
चाहत अब ज़िन्दगी में बहार न लाएगी
उम्मीद का हर फूल हमने मसल दिया
सोचते हैं अहसास न कुछ बोल जाये
डर से कलम का सर ही कुचल दिया
कुछ बातों का असर जाता नहीं
लफ्जों ने हौसलों को क़तर दिया
न ख़ुशी से ख़ुशी न ज़ख्मों ने दर्द दिया
न दोस्तों से उम्मीद न दुश्मनों से गिला
ज़िन्दगी का हिसाब कुछ तो कर दिया
ज़िंदगी से कब तक लड़ते जायेंगे
हार मान इस किस्से को बदल दिया
चाहत अब ज़िन्दगी में बहार न लाएगी
उम्मीद का हर फूल हमने मसल दिया
सोचते हैं अहसास न कुछ बोल जाये
डर से कलम का सर ही कुचल दिया
कुछ बातों का असर जाता नहीं
लफ्जों ने हौसलों को क़तर दिया
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