नींद ना सही कोई ख्वाब ही चली आये
ज़िन्दगी जीने की कोई तो वजह बताये
जो कभी पूरी हो सकती नहीं
ऐसी बातों पे उम्मीद क्यूँ जगाये
बहुत तोहफ़े पाएं हैं ज़िन्दगी से
अफ़सोस खोलने से ये टूट जाये
बिन मकसद ज़िन्दगी चलती नहीं
ये राज खुद को कैसे समझाए
जिनसे बातें करना है मुहाल
उनसे हम अपना जवाब चाहें
दुनिया बदलने की चाहत थी कभी
अब लगता है बस घर संवर जाये
ज़िन्दगी जीने की कोई तो वजह बताये
जो कभी पूरी हो सकती नहीं
ऐसी बातों पे उम्मीद क्यूँ जगाये
बहुत तोहफ़े पाएं हैं ज़िन्दगी से
अफ़सोस खोलने से ये टूट जाये
बिन मकसद ज़िन्दगी चलती नहीं
ये राज खुद को कैसे समझाए
जिनसे बातें करना है मुहाल
उनसे हम अपना जवाब चाहें
दुनिया बदलने की चाहत थी कभी
अब लगता है बस घर संवर जाये
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