ना-उम्मीदी में एक आस बाक़ी है
बुझे दीये में कुछ राख बाक़ी है
घर जला के भी हम मुस्कुरा बैठे
आसपास लाखों सौगात बाक़ी है
वो मुसाफिर है लौट के न आ पायेगा
दिल में उम्मीद की क्यूँ साँस बाक़ी है
हर राज दिल का हमने खोल दिया
पर घुटन की वो आवाज बाक़ी है
रात पे फिर देखिये एक अँधेरा छाया है
चिरागों का बस कुछ दूर का साथ बाक़ी है
ज़िन्दगी कैसे मुँह फेर के जाएगी
जिस्म में अभी भी ज़ज़्बात बाक़ी है
वक्त का फिर एक बार सामना होगा
कुछ तो ज़िन्दगी में ख्यालात बाक़ी है
बच्चों को गिरने दो फ़िसलने दो
सहारे के लिए बड़ों के हाथ बाक़ी है
उम्र कुछ समझौता भी सिखाती है
हौसले के कहाँ वो हालात बाक़ी है
सूखा पेड़ नींव की बातों से घबराये
गिरने के लिए एक बरसात बाक़ी है
गिरेंगे तो लोग और गिराते जायेंगे
कुचलने के लिए फ़ौलाद बाक़ी है
जीत और हार में ज़िन्दगी नापते हैं
इंसानों में कितने आफ़ात* बाक़ी है
उन नासमझों को कैसे हम समझाएं
सितारे देख जो कहे आफ़्ताब बाक़ी है
नाम कमाने इस दुनिया में आएं हैं
या खुदा तेरे कितने ज़मात बाक़ी है
वक्त कहता है चुप होने में समझदारी है
हर किसी की आँखों में सवालात बाक़ी है
आफ़ात - मुसीबतें
बुझे दीये में कुछ राख बाक़ी है
घर जला के भी हम मुस्कुरा बैठे
आसपास लाखों सौगात बाक़ी है
वो मुसाफिर है लौट के न आ पायेगा
दिल में उम्मीद की क्यूँ साँस बाक़ी है
हर राज दिल का हमने खोल दिया
पर घुटन की वो आवाज बाक़ी है
रात पे फिर देखिये एक अँधेरा छाया है
चिरागों का बस कुछ दूर का साथ बाक़ी है
ज़िन्दगी कैसे मुँह फेर के जाएगी
जिस्म में अभी भी ज़ज़्बात बाक़ी है
वक्त का फिर एक बार सामना होगा
कुछ तो ज़िन्दगी में ख्यालात बाक़ी है
बच्चों को गिरने दो फ़िसलने दो
सहारे के लिए बड़ों के हाथ बाक़ी है
उम्र कुछ समझौता भी सिखाती है
हौसले के कहाँ वो हालात बाक़ी है
सूखा पेड़ नींव की बातों से घबराये
गिरने के लिए एक बरसात बाक़ी है
गिरेंगे तो लोग और गिराते जायेंगे
कुचलने के लिए फ़ौलाद बाक़ी है
जीत और हार में ज़िन्दगी नापते हैं
इंसानों में कितने आफ़ात* बाक़ी है
उन नासमझों को कैसे हम समझाएं
सितारे देख जो कहे आफ़्ताब बाक़ी है
नाम कमाने इस दुनिया में आएं हैं
या खुदा तेरे कितने ज़मात बाक़ी है
वक्त कहता है चुप होने में समझदारी है
हर किसी की आँखों में सवालात बाक़ी है
आफ़ात - मुसीबतें
बहोत खूब लिखा
ReplyDeleteतहे दिल से शुक्रिया
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