मोल ज़िन्दगी का फिर चूका दिया
लीजिये हमने फिर मुस्कुरा दिया
आसमान सबकी किस्मत में होता नहीं
कुछ ने आंगन से भी ख्वाब बना लिया
लोगों की हम अब क्या बात करे
मौका मिलते ही ज़ख्म लगा दिया
और कितना बॅटवारा होगा इस घर का
आंगन में भी आपने अँधेरा जगा दिया
थक चुके हैं ज़िन्दगी को हिसाब देते देते
हर रोज़ इसने एक नया कर्ज चढ़ा दिया
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