Friday, 6 April 2018

मोल ज़िन्दगी का फिर चूका दिया

मोल  ज़िन्दगी का फिर चूका दिया 
लीजिये हमने फिर मुस्कुरा दिया 

आसमान सबकी किस्मत में होता नहीं 
कुछ ने आंगन से भी ख्वाब बना लिया

लोगों की हम अब क्या बात करे 
मौका मिलते ही ज़ख्म लगा दिया

और कितना बॅटवारा होगा इस घर का 
आंगन में भी आपने अँधेरा जगा दिया

थक चुके हैं ज़िन्दगी को हिसाब देते देते 
हर रोज़ इसने एक नया कर्ज चढ़ा दिया    

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