हमने कब चाहा वक्त बदल जाये
पर वक्त हमारी समझ में तो आये
मुश्किल है उन रास्तों पे चलना
जो मंज़िल का पता नहीं बताये
बागबाँ कली से कह न पाया
इंतज़ार में वो दिन बिताये
ये ख्वाब ही ज़िन्दगी की चाहत है
ये ख्वाब ही इसे चोट भी पहुचाये
गलत ने राह बताया सही ने चलना सिखाया
पर ये उलझन दिन रात बस हमें है सताए
हम कह सकते हैं समझा सकते नहीं
खुद की समझ से ही कोई समझ पाए
वक्त भी खुद में उलझा हुआ
वक्त भी खुद को कुछ सुलझाए
पर वक्त हमारी समझ में तो आये
मुश्किल है उन रास्तों पे चलना
जो मंज़िल का पता नहीं बताये
बागबाँ कली से कह न पाया
इंतज़ार में वो दिन बिताये
ये ख्वाब ही ज़िन्दगी की चाहत है
ये ख्वाब ही इसे चोट भी पहुचाये
गलत ने राह बताया सही ने चलना सिखाया
पर ये उलझन दिन रात बस हमें है सताए
हम कह सकते हैं समझा सकते नहीं
खुद की समझ से ही कोई समझ पाए
वक्त भी खुद में उलझा हुआ
वक्त भी खुद को कुछ सुलझाए
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