मन से जो उतर गए उनका ख्याल क्या
मन में जो उतर गए उनपर सवाल क्या
वो तो बोल कर फिर मुकर जायेंगे
ऐसे लोगों की बातों पर बवाल क्या
वो जो आप बोलेंगे लोग भूल जायेंगे
वो जो आपने किया वैसा मिसाल क्या
बुर्दबारी से आगे बढते जाना है
बिन सब्र के देखा है हिलाल क्या
जो लाल न मिला पीले से सजा लिया
बिन रंगों के होता है कोई गुलाल क्या
जो बीत गया न आयेगा टूटा न जुड़ पायेगा
फिर इन सारी बातों पर इतना मलाल क्या
ज़िन्दगी से हम हार जायेंगे
रुस्वाई की इतनी मजाल क्या
मन में जो उतर गए उनपर सवाल क्या
वो तो बोल कर फिर मुकर जायेंगे
ऐसे लोगों की बातों पर बवाल क्या
वो जो आप बोलेंगे लोग भूल जायेंगे
वो जो आपने किया वैसा मिसाल क्या
बुर्दबारी से आगे बढते जाना है
बिन सब्र के देखा है हिलाल क्या
जो लाल न मिला पीले से सजा लिया
बिन रंगों के होता है कोई गुलाल क्या
जो बीत गया न आयेगा टूटा न जुड़ पायेगा
फिर इन सारी बातों पर इतना मलाल क्या
ज़िन्दगी से हम हार जायेंगे
रुस्वाई की इतनी मजाल क्या
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