Wednesday, 11 October 2017

उम्मीदों से अपनी ज़िन्दगी ज़रूर सजाइये

उम्मीदों से अपनी ज़िन्दगी ज़रूर सजाइये
पर वक्त के साथ कुछ चलते भी जाइये 

उम्मीद अँधेरे आसमान का बस सितारा है 
घर के अँधेरे के लिए एक दीया भी जलाइए 

माना अँधेरे में आप सच के साथ थे 
तो रौशनी को भी हर सच बतलाइये 

उम्मीद कभी भी रूप बदल सकती है 
नाउम्मीदी की कुछ तैयारी भी चाहिए 

ख्वाबों को जी लिया बहुत इस दिल ने  
अब कुछ हकीकत को भी आज़माइये

झूठी उम्मीद से वक्त कटेगा संभलेगा नहीं 
कुछ सच्ची बातों को आप यूँ न झुठलाइये

उम्मीद सच है तो दर्द का भी एक अफ़्साना है
दर्द को आप उम्मीद का हिजाब मत पहनाइए  

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