दौड़ता वक्त हैं क्यों वो फिर लौट कर आयेगा
उम्मीदों की धूल है कि वक्त बदल जायेगा
चलिए एक बार फिर खुद को सतायें
शायद दर्द ही दर्द को कुछ हँसायेगा
ये रौशनी फिर शोर मचा रही है
लगता है अब चिराग़ बुझ जायेगा
फूल को बिखरने की बातें न सुनायें
मायूसी से वो यूँ ही मुरझायेगा
हम थक चुके हैं अपनी इस जीत से
जश्न जीत का अब कौन मनायेगा
बार बार छूने से ज़ख्म भरता नहीं
ये बात वक्त को कौन समझायेगा
उम्मीदों की धूल है कि वक्त बदल जायेगा
चलिए एक बार फिर खुद को सतायें
शायद दर्द ही दर्द को कुछ हँसायेगा
ये रौशनी फिर शोर मचा रही है
लगता है अब चिराग़ बुझ जायेगा
फूल को बिखरने की बातें न सुनायें
मायूसी से वो यूँ ही मुरझायेगा
हम थक चुके हैं अपनी इस जीत से
जश्न जीत का अब कौन मनायेगा
बार बार छूने से ज़ख्म भरता नहीं
ये बात वक्त को कौन समझायेगा
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