जी चाहता महसूस करते जी चाहता छोड़ जाते
आँखों की तरह काश दिल को भी बंद कर पाते
आँखों की तरह काश दिल को भी बंद कर पाते
वक्त को वो सच हम कैसे बतलायें
जिसे हम खुद से भी अब तक हैं छुपाते
अब हमें सबसे कुछ दुरी ही है पसंद
अब हम खुद को नहीं तोडना चाहते
जीवन का सबसे बड़ा सच भी वही है
जो हम देख कर भी नहीं देखना चाहते
कभी चाही थी नज़रे इनायत उन्हीं से
आज उन्हीं के नाम से हम हैं घबराते
लीजिये वो वक्त भी चलकर आ ही गया
अब आपके नाम से हम नहीं मुस्कुराते
No comments:
Post a Comment