Monday, 16 October 2017

जी चाहता महसूस करते जी चाहता छोड़ जाते

जी चाहता महसूस करते जी चाहता छोड़ जाते
आँखों की तरह काश दिल को भी बंद कर पाते     

वक्त को वो सच हम कैसे  बतलायें           
जिसे हम खुद से भी अब तक हैं छुपाते

अब हमें सबसे कुछ दुरी ही है पसंद 
अब हम खुद को नहीं तोडना चाहते 

जीवन का सबसे बड़ा सच भी वही है 
जो हम देख कर भी नहीं देखना चाहते  

कभी चाही थी नज़रे इनायत उन्हीं से 
आज उन्हीं के नाम से हम हैं घबराते  

लीजिये वो वक्त भी चलकर आ ही गया 
अब आपके नाम से हम नहीं मुस्कुराते 

दुनिया अब हमे क्यों आवाज लगाए
अब हम एक गहरी नींद सोना चाहते



No comments:

Post a Comment