हर चेहरे ने अपना ज़ख़्म अपना गम बताया है
किसी ने अश्क किसी ने मुस्कान से छिपाया है
अपनी ही उम्मीदों से हम इतने घायल हैं
अपनी ही उम्मीदों ने हमें ज़ख्म पहुंचाया है
हम ख़ुद को अब कैसे पहचानेंगे
वक्त का हम पे भी पड़ा साया है
दिल कहे कुछ भूल कर मुस्कुराओ
यादों पे तो ग़मों का बादल छाया है
आपने देखिये हमें किस क़दर बदल दिया
ये अहसान तो आपका हम पर बकाया है
कुछ ज़ख्मों के साथ ही हमें चलना है
देर से ही सही अब ये समझ आया है
न दिलदार न बेक़रार न इंतज़ार न इक़रार
ये कौन सा मक़ाम इश्क़ में हमने पाया है
हम टूटे दिल से भी कहे इश्क़ को शुक्रिया
उसने हमे अंधेरों में रास्ता तो दिखाया है
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