जिसे देखिये बस अपनी ही बोल रहे
अपना दर्द अपनी यादों को खोल रहे
शम्मा के उजाले की चाहता है सबको
पर उसके शोर को लोग आग बोल रहे
खुद की हौसला-अफज़ाई का शुक्रिया
आज लगा हम बेमतलब नहीं डोल रहे
हमारी नज़रों की है इनायत हमपे
वार्ना जिसे देखिये हमें बस तोल रहे
खुद के मतलब की बात समझ रहे सब
दूसरे के ज़ख्मों को बस यूँ ही टटोल रहे
अपना दर्द अपनी यादों को खोल रहे
शम्मा के उजाले की चाहता है सबको
पर उसके शोर को लोग आग बोल रहे
खुद की हौसला-अफज़ाई का शुक्रिया
आज लगा हम बेमतलब नहीं डोल रहे
हमारी नज़रों की है इनायत हमपे
वार्ना जिसे देखिये हमें बस तोल रहे
खुद के मतलब की बात समझ रहे सब
दूसरे के ज़ख्मों को बस यूँ ही टटोल रहे
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