गुजरा वक्त फिर सामने आ गया
बीता कल आज से फिर टकरा गया
एक भूल को हम भूल न पाए
वो खुद को फिर याद दिला गया
चाह कर हम कभी सो न पाए
कौन इस तरह हमें जगा गया
न मरने की चाहत न जीने की ख्वाहिश
वक्त ये कौन सा रिश्ता अब निभा गया
किसी को हम आज तक माफ़ न कर पायें
और उम्मीद हमारी सारी गलतियां वो भुला गया
उसे बस जलने की सज़ा हो
शम्मा फिर कोई जला गया
बीता कल आज से फिर टकरा गया
एक भूल को हम भूल न पाए
वो खुद को फिर याद दिला गया
चाह कर हम कभी सो न पाए
कौन इस तरह हमें जगा गया
न मरने की चाहत न जीने की ख्वाहिश
वक्त ये कौन सा रिश्ता अब निभा गया
किसी को हम आज तक माफ़ न कर पायें
और उम्मीद हमारी सारी गलतियां वो भुला गया
उसे बस जलने की सज़ा हो
शम्मा फिर कोई जला गया
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