Thursday, 15 June 2017

सिर्फ़ सोचना नहीं कुछ करना भी ज़रूरी

सिर्फ़ सोचना नहीं कुछ करना भी ज़रूरी
कहीं पहुँचने के लिए चलना भी ज़रूरी है

ना पसंद आपको अपने घर के साजो-सामान  
बदलने के लिए पर घर से निकलना भी ज़रूरी है

पाने की चाहत में और कितना चलते जाएँगे
जो पाया उसके लिए कुछ ठहरना भी ज़रूरी है

क्यूँ परेशान हैं आप महफ़िल से उठ के जाने वालों से
वक़्त की दहलीज़ से उनका निकलना भी ज़रूरी है

अब तक उलझनों में ही पड़े हैं ये कैसी बंद गली है
तो वक़्त का इशारा है साथ छोड़ बढ़ना भी ज़रूरी है

वक़्त फिर ख़ुर्शीद को आसमान पे लाएगा  
सुबह के लिए पर रात का ढलना भी ज़रूरी है

किसी और को बदलने की चाहत रखते हैं
तो आपको ख़ुद को बदलना भी ज़रूरी है


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