Friday, 16 June 2017

हर बात बोल चुके हैं तो बैठ जाइये

हर बात बोल चुके हैं तो बैठ जाइये
बिन बात की बात अब और बढ़ाइये

ज़िंदगी के वो कोने भी चाहिए हुज़ूर
जहाँ वक़्त के रूख को बैठ देख पाइए

ज़िंदगी ने कुर्सियाँ बिछाई हैं सौ-हज़ार  
आगे की पंक्ति में बैठने से घबराइए

तन्हाई भी बहुत कुछ सिखाती है साहेब
हो सके कुछ पल साथ ख़ुद बैठ बिताइए

कुछ राज की बातें हमने क्या बताई
हर कोई कहे उन्हें महफ़िल में बुलाइए

कभी यूँ ही फ़ुर्सत में बैठ जाइए जनाब
बोलिए दिल से कुछ दिल की सुनाइए





2 comments:

  1. Me always a back bencher ! 😎😎😎

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    1. Well so now take the front seat....Oops you already have :):)

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