हर बात बोल चुके हैं तो बैठ जाइये
बिन बात की बात अब और न बढ़ाइये
ज़िंदगी के वो कोने भी चाहिए ए हुज़ूर
जहाँ वक़्त के रूख को बैठ देख पाइए
ज़िंदगी ने कुर्सियाँ बिछाई हैं सौ-हज़ार
आगे की पंक्ति में बैठने से न घबराइए
तन्हाई भी बहुत कुछ सिखाती है साहेब
हो सके कुछ पल साथ ख़ुद बैठ बिताइए
कुछ राज की बातें हमने क्या बताई
हर कोई कहे उन्हें महफ़िल में बुलाइए
कभी यूँ ही फ़ुर्सत में बैठ जाइए जनाब
Me always a back bencher ! 😎😎😎
ReplyDeleteWell so now take the front seat....Oops you already have :):)
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