इश्क़ हर हाल में न टूटते हुए संभल जाने में है
इश्क़ किसी को समझने और समझाने में है
वक़्त के हालात से हर कोई मात खाएगा
इश्क़ बिना दूर गए उन्हें पास बुलाने में है
ये क्या बोल कर सुनना और लफ़्ज़ों से समझाना
इश्क़ बिना कुछ कहे दिल की हर बात बताने में है
बात बेबाक़ी से कहना बेबाक़ी से बतलाना
इश्क़ झूठ से हर बार सच को जिताने में है
अब क्या कहें इश्क़ के कितने फ़लसफ़े
इश्क़ ख़ुदगर्ज़ नहीं ये टूटे अफ़साने में है
इश्क़ ख़ुदगर्ज़ नहीं ये टूटे अफ़साने में है
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