दिल की हर बात लिख कर सुना रहे हैं
वक़्त के पन्ने पे कुछ निशां बना रहे हैं
फिर दिल की धड़कनों से आज
कुछ ख़ाली पन्ने भरने जा रहे हैं
कुछ टूटे सपने कुछ अधूरे ख़्वाब
इसे लिख कर ख़ुद को बहला रहे हैं
वो हक़ीक़त जो ख़ुद को न देख पाएगा
उस सच को हम लिख कर सुना रहे हैं
कोई हमारी अब सुनता कहाँ है
काग़ज़ को लिख कर बता रहे हैं
अब हम ख़ुद से भी कुछ डरने लगे हैं
हर बात जो बेधड़क लिखते जा रहे हैं
क्या बताएँ कि लिख कर हमें क्या मिला
कुछ तो है जो हम आज भी लिखे जा रहे हैं
Bahut Khoob ! Keep writing !
ReplyDeletethanks ....taking all from my twitter and putting it here ...
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