Monday, 12 June 2017

दिल की हर बात लिख कर सुना रहे हैं

दिल की हर बात लिख कर सुना रहे हैं
वक़्त के पन्ने पे कुछ निशां बना रहे हैं

फिर दिल की धड़कनों से आज  
कुछ ख़ाली पन्ने भरने जा रहे हैं

कुछ टूटे सपने कुछ अधूरे ख़्वाब
इसे लिख कर ख़ुद को बहला रहे हैं

वो हक़ीक़त जो ख़ुद को देख पाएगा
उस सच को हम लिख कर सुना रहे हैं

कोई हमारी अब सुनता कहाँ है 
काग़ज़ को लिख कर बता रहे हैं

अब हम ख़ुद से भी कुछ डरने लगे हैं
हर बात जो बेधड़क लिखते जा रहे हैं

क्या बताएँ कि लिख कर हमें क्या मिला
कुछ तो है जो हम आज भी लिखे जा रहे हैं



2 comments:

  1. thanks ....taking all from my twitter and putting it here ...

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