हर बार झूठ दिल
को सहलाये
हर बार सच
उसे तोड़ने आये
फिर सच के सामने वो झूठ बेसहारा है
हर बार जिस झूठ से हम दिल बहलायें
सिर्फ़ दुश्मन
ही अब सच बोले हैं
हर बार
दोस्ती हमने झूठ से बचाये
क्या ग़लत उस
प्यारी-सी झूठ में
हर बार
बच्चे जिसे सुन मुस्कुराये
झूठ से इतनी
नफ़रत करने वालो
हर बार झूठ भी कुछ समझाने आये
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