सुबह की आस लिए सुबह की प्यास लिए
देखो सूरज फिर डूबा ख़ुद में विश्वास लिए
कुछ खो कर कुछ पाया है पाने में कितना गँवाया है
पाना-खोना साथ रहे एक दूजे की कुछ आस लिए
ग़म आते ख़ुशी रूठ गई
ख़ुशी देख ग़म भी टूट गया
पर दोनों जीवनभर साथ
रहे एकदूसरे को आस-पास लिए
एक किनारा जो ओझल हो जाएगा
तो दूसरा नज़र आयेगा
नाविक की फिर आस बंधी
वो चला नौका अपने साथ लिए
अँधेरा कब तक सतायेगा वक़्त
कितना ठहर पाएगा
भोर साथ किरण ले आएगी उम्मीदों की बरसात लिए
बोझ से क्यूँ कोई हारा
है बोझ ख़ुद में कितना बेसहारा है
ख़ुशियों के पहिए लगा देखो
ये चलेगा हल्के का अहसास लिए
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