Tuesday, 13 June 2017

कैसे कहें कौन से जन्मों का रिश्ता है

कैसे कहें कौन से जन्मों का रिश्ता है
मेरा घर मेरे साथ रोया साथ हँसता है

बस जिस्म को लेकर हम चले आएँ
रूह तो आज भी घर में ही बसता है

प्यार, उम्मीद, सपने सब इस घर से बँधे हैं
कैसे मान लें सिर्फ़ दीवार-छत का एक रिश्ता है

दिन से ज़्यादा रातों में इसकी याद आई
उजालों के साथ अंधेरों से भी इसका रिश्ता है

पूरी दुनिया घूम कर हम देख आये
घर जैसा आराम पैसे से नहीं बिकता है

अब और कितना घर की बात बताये
धरती पे स्वर्ग हमें घर में ही दिखता है



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