कैसे कहें कौन से जन्मों का रिश्ता है
मेरा घर मेरे साथ रोया साथ हँसता है
बस जिस्म को लेकर हम चले आएँ
रूह तो आज भी घर में ही बसता है
प्यार, उम्मीद, सपने सब इस घर से बँधे हैं
कैसे मान लें सिर्फ़ दीवार-छत का एक रिश्ता है
दिन से ज़्यादा रातों में इसकी याद आई
उजालों के साथ अंधेरों से भी इसका रिश्ता है
पूरी दुनिया घूम कर हम देख आये
घर जैसा आराम पैसे से नहीं बिकता है
अब और कितना घर की बात बताये
धरती पे स्वर्ग हमें घर में ही दिखता है
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