Friday, 16 June 2017

पैरों को ज़मीं का इख़्तियार कहाँ

पैरों को ज़मीं का इख़्तियार कहाँ
अपनी बातों पे हमें ऐतबार कहाँ 

हर सच से दिल बख़ूबी वाक़िफ़ है
पर दिल की बातों का अख़बार कहाँ

हम ज़िंदगी में कई बार ठोकर खाएँगे    
बातों में न आना आदत में शुमार कहाँ

ये बातें भी उन तक पहुँच जाएगी 
बातों के लिए सरहद कोई दीवार कहाँ 

इश्क़ वक़्त के साथ बदल ही जाता है
अब वो ख़लिश वो तड़प वो ख़ुमार कहाँ 


4 comments:

  1. जो वक़्त के साथ बदल जाए वो इश्क़ कहाँ
    लम्हे इबादत के सदा रहते हैं जवां
    इबादत-ए यार भी है खुदा की पूजा
    जो इसे छोड़ दे वो इश्क़ कहाँ

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    1. इश्क़ इबादत नहीं एक अहसास है
      इश्क़ भी भरोसे का ही एक साथ है

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