Wednesday, 3 May 2017

हमारी ज़िंदगी में कोने कोने में मज़दूरों का दिया सामान है

हमारी ज़िंदगी में कोने कोने में मज़दूरों का दिया सामान है
वो काम से अभिशप्त पर काम ही उनका एक इनाम है

कुछ लोगों को ये ग़ुरूर उन्होंने दिमाग़ से सब कुछ बसाया
हम पूछतें हैं दिमाग़ से क्या उन्होंने उसे दिया अंजाम है

कुछ पल मेहनतकशों के साथ भी हो सके बितायें
उनकी मुस्कुराहट में देखिये कितना सुकून और आराम है

चलिए कुछ जश्न आज हम भी माना ले
हमारी ज़िंदगी में कुछ तो मेहनत का योगदान है

हम जो हफ़्ते के अंत में छुट्टियाँ हैं मनाते
वो भी तो मज़दूरों का हमें दिया वरदान है

ये दुनिया आज भी मेहनतकशों पर है टिकी
आज हमारा आपको बस इतना ही पैग़ाम है


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