हमारी ज़िंदगी में कोने
कोने में मज़दूरों का दिया सामान है
वो काम से अभिशप्त पर काम ही उनका एक इनाम है
कुछ लोगों को ये ग़ुरूर
उन्होंने दिमाग़ से सब कुछ बसाया
हम पूछतें हैं दिमाग़
से क्या उन्होंने उसे दिया अंजाम है
कुछ पल मेहनतकशों के
साथ भी हो सके बितायें
उनकी मुस्कुराहट में देखिये कितना सुकून और आराम है
चलिए कुछ जश्न आज हम
भी माना ले
हमारी ज़िंदगी में कुछ तो मेहनत का योगदान है
हम जो हफ़्ते के अंत
में छुट्टियाँ हैं मनाते
वो भी तो मज़दूरों का
हमें दिया वरदान है
ये दुनिया आज भी
मेहनतकशों पर है टिकी
आज हमारा आपको बस इतना ही
पैग़ाम है
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