Monday, 1 May 2017

ख़ाली पेट थे रोटियाँ देख ताली बजा रहे होंगे

ख़ाली पेट थे रोटियाँ देख ताली बजा रहे होंगे
नेता उन्हीं तालियों पे वाह-वाही पा रहे होंगे

रोटी के आगे हर ग़म कुछ-कुछ झुका दिखा
हम रोटी की ज़िंदगी ही जिये जा रहे होंगे

स्वाभिमान की बातें उनको आये हो समझाने
भूख जिन्हें चोरी करना भी सिखा रहे होंगे

वो देश की ख़ातिर मरा वो देश पर मार-मिटा
रोटी तो बस लोग यूँ ही कमाने जा रहे होंगे

जिस दिन सबका पेट रोटी से भर जाएगा
लोग ख़ुद को ख़ुदा भी देखना बता रहे होंगे


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