ग़ुलामी की ज़ंजीर पहना इंक़िलाब बुलवा रहे हैं
सही है आप देश में एक नई क्रांति ही ला रहे हैं
सबको चुप करवाना मक़सद है आपकी बोली का
और आप बोलकर हमें इंक़िलाब भी समझा रहे हैं
देखिए देश कितनी तेज़ी से बदल रहा है
लोग सच के लिए बोलने से क़तरा रहे हैं
हमने मज़हब को घर के भीतर क़ैद किया है
पर हुक्मरान मज़हब से इंकिलाब चाह रहे हैं
कल तक हर बात पर इंकिलाब चिल्लाने वाले
आज भूख से तड़पते हुए क्यूँ नज़र आ रहे हैं
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