Friday, 12 May 2017

ग़ुलामी की ज़ंजीर पहना इंक़िलाब बुलवा रहे हैं

ग़ुलामी की ज़ंजीर पहना इंक़िलाब बुलवा रहे हैं
सही है आप देश में एक नई क्रांति ही ला रहे हैं

सबको चुप करवाना मक़सद है आपकी बोली का
और आप बोलकर हमें इंक़िलाब भी समझा रहे हैं

देखिए देश कितनी तेज़ी से बदल रहा है
लोग सच के लिए बोलने से क़तरा रहे हैं

हमने मज़हब को घर के भीतर क़ैद किया है
पर हुक्मरान मज़हब से इंकिलाब चाह रहे हैं

कल तक हर बात पर इंकिलाब चिल्लाने वाले
आज भूख से तड़पते हुए क्यूँ नज़र रहे हैं



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