कुछ दाग़ जो हमें रोज़ नज़र आ रहे थे
अब हम उसे वक़्त से छिपाने जा रहे थे
हर बात में तंज करने का उनका अन्दाज़
वो हमपे वार करने का मौक़ा कब गवाँ रहे थे
अंत में सब कुछ ठीक हो ही जाएगा
इसी उम्मीद में हम अंत को ही झुठला रहे थे
अगर दोस्ती कभी ख़त्म नहीं हो सकती
तो क्या हम दुश्मनी को दोस्ती बता रहे थे
एक सौदा अब ख़ुद से हमने कर लिया
ख़ुद के सच को हम झूठ से ख़रीदने जा रहे थे
अब हम उसे वक़्त से छिपाने जा रहे थे
हर बात में तंज करने का उनका अन्दाज़
वो हमपे वार करने का मौक़ा कब गवाँ रहे थे
अंत में सब कुछ ठीक हो ही जाएगा
इसी उम्मीद में हम अंत को ही झुठला रहे थे
अगर दोस्ती कभी ख़त्म नहीं हो सकती
तो क्या हम दुश्मनी को दोस्ती बता रहे थे
एक सौदा अब ख़ुद से हमने कर लिया
ख़ुद के सच को हम झूठ से ख़रीदने जा रहे थे
तंज कसना ही तो उनका अंदाज़ था पुराना
ReplyDeleteउनकी इस अदा को आप ही झुठला रहे थे
दोस्ती का अंत खूबसूरत बनाने को आपकी कोशिशों में
वो अपना स्वार्थ सिद्ध किए जा रहे थे
दोस्ती में कोई भी बोझ होता नहीं
Deleteदोस्ती ख़ुद को लेने देने में खोता नहीं