Wednesday, 30 November 2016

ख़ुद को समझाने में हमें वक़्त लगे

ख़ुद को ही समझाने में हमें वक़्त लगे
ख़ुद को सच दिखलाने में हमें वक़्त लगे।

इश्क़ की हक़ीक़त से तो हम वाक़िफ़ थे
पर दिल को हक़ीक़त बताने में हमें वक़्त लगे।

ज़िंदगी यूँ ही ख़्वाबों-ख़यालों पर चल पड़ी 
कुछ ख़्वाबों को ज़िंदगी से हटाने में हमें वक़्त लगे।

दूर तक नज़रों ने उम्मीदों से देखा था एक जहाँ
उम्मीदों को उन राहों से वापस लाने हमें वक़्त लगे।

जिन की ख़ातिर हम टूटे टूटे से रहते थे
उन्हें भी दिल से तोड़ कर हटाने में हमें वक़्त लगे।

ख़ुद से ही हर वक़्त रहा शिकवा-ए-रू-ब-रू
ख़ुद को ख़ुद से रू-ब-रू करवाने में हमें वक़्त लगे।



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