आज रौशनी थी सूरज का कुछ न था पता
सूरज आज कहीं दूर बादलों में था छिपा
हैरान हूँ लोग सूरज की क़समें है खाते
हर वक़्त सूरज के कितने गुण है गाते
रौशनी पर किसी का ध्यान कुछ कम क्यूँ है जाता
रौशनी के काम को सबने कम
क्यूँ कर है आकाँ
रौशनी सूरज की संगनी बन
उस के साथ है खड़ी
रौशनी लगता है सूरज के
लिए ही तो जी रही
रौशनी ने सूरज का हर
सुख दुःख है अपनाया
रौशनी ने सूरज को हर एक
रूप में है चाहा
सूरज सिर्फ़ आसमान से ही दोस्ती निभाता है
धरती के लिए कब वो
ज़मीन पर आता है
सूरज आज भी ख़ुद को
सिर्फ़ आसमान में है समेटे
जबकि रौशनी ने ख़ुद को
धरती पर है फैलाया
रौशनी सूरज की गरमी ढो
कर धरती तक है लाती
सूरज का पैग़ाम धरती के
कोने कोने में है पहुँचाती
कई बार सूरज को बादलों
से डरते भी है देखा
उसे आसमान में बादलों
से घिरते बचते है देखा
कई बार सूरज ने ख़ुद को
बादलों से है छिपाया
पर रौशनी ने हर बार
अपना फ़र्ज़ है निभाया
जितना बन पड़ता है वो
बादलों को है चीर कर आती
बादलों की दीवारें लाँघ
धरती को है रौशनी पहुँचाती
सूरज रौशनी के साथ कहाँ
कभी अकेला है
रौशनी ने सूरज के हर
सुख दुःख को झेला है
सूरज के उठने से कितने
पहले वो उठ जाती
सूरज के सोने के कई
घंटों बात वो सो पाती
सूरज के ग्रहण से भी वो होती है कितनी परेशान
सूरज के दर्द में खो जाता है उसका भी तो निशान
सूरज के दुःख में वो भी
खो चुकी है
ग्रहण को देख वो भी गुम
हो चुकी है
सूरज के बिना रौशनी का
अस्तित्व भी फीका है
सूरज के रूप में उसे अपना हमराही दिखा है
जब तक रौशनी है सूरज तब तक ज़िंदा रहेगा
हर वक़्त हर मोड़ में
रौशनी का उसे सहारा मिलेगा
सूरज कभी रौशनी के बिना
नहीं जी पायेगा
रौशनी के बिना सूरज
सूरज कब रह जाएगा
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