Friday, 25 November 2016

रौशनी और सूरज

आज रौशनी थी सूरज का कुछ   था पता
सूरज आज कहीं दूर बादलों में था छिपा 

हैरान हूँ लोग सूरज की क़समें है खाते
हर वक़्त सूरज के कितने गुण है गाते

रौशनी पर किसी का ध्यान कुछ कम क्यूँ है जाता
रौशनी के काम को सबने कम क्यूँ कर है आकाँ

रौशनी सूरज की संगनी बन उस के साथ है खड़ी
रौशनी लगता है सूरज के लिए ही तो जी रही

रौशनी ने सूरज का हर सुख दुःख है अपनाया
रौशनी ने सूरज को हर एक रूप में है चाहा

सूरज सिर्फ़ आसमान से ही दोस्ती निभाता है 
धरती के लिए कब वो ज़मीन पर आता है 

सूरज आज भी ख़ुद को सिर्फ़ आसमान में है समेटे
जबकि रौशनी ने ख़ुद को धरती पर है फैलाया

रौशनी सूरज की गरमी ढो कर धरती तक है लाती
सूरज का पैग़ाम धरती के कोने कोने में है पहुँचाती

कई बार सूरज को बादलों से डरते भी है देखा
उसे आसमान में बादलों से घिरते बचते है देखा

कई बार सूरज ने ख़ुद को बादलों से है छिपाया
पर रौशनी ने हर बार अपना फ़र्ज़ है निभाया

जितना बन पड़ता है वो बादलों को है चीर कर आती
बादलों की दीवारें लाँघ धरती को है रौशनी पहुँचाती 

सूरज रौशनी के साथ कहाँ कभी अकेला है
रौशनी ने सूरज के हर सुख दुःख को झेला है 

सूरज के उठने से कितने पहले वो उठ जाती
सूरज के सोने के कई घंटों बात वो सो पाती

सूरज के ग्रहण से भी वो होती है कितनी परेशान
सूरज के दर्द में खो जाता है उसका भी तो निशान

सूरज के दुःख में वो भी खो चुकी है
ग्रहण को देख वो भी गुम हो चुकी है

सूरज के बिना रौशनी का अस्तित्व भी फीका है
सूरज के रूप में उसे अपना हमराही दिखा है

जब तक रौशनी है सूरज तब तक ज़िंदा रहेगा
हर वक़्त हर मोड़ में रौशनी का उसे सहारा मिलेगा 

सूरज कभी रौशनी के बिना नहीं जी पायेगा
रौशनी के बिना सूरज सूरज कब रह जाएगा


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