ख़यालों में फिर वही पुराना ख़याल था
कोई क्यूँ हमारे ख़यालों में इतना सवार था
हम तो आज भी इस दिल पे
हैरान हैं
ये हमारे अंदर छुपा कौन
इतना बेहाल था
दिल की बस्ती कभी रौनक़
थी जिनसे
वीरानगी में भी क्यूँ उन्हीं का सवाल था
बेहाल-ए-हालत इस दिल का
इश्क़ कर चुका है
पर दिल को इस बात पर कहाँ कोई मलाल था
सुकून-ए-रूह की तलाश हर
वक़्त जारी है
फिर भी दिल मानता कहाँ
इश्क़ एक बवाल था
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