Thursday, 3 November 2016

ख़यालों में फिर वही पुराना ख़याल था

ख़यालों में फिर वही पुराना ख़याल था
कोई क्यूँ हमारे ख़यालों में इतना सवार था

हम तो आज भी इस दिल पे हैरान हैं
ये हमारे अंदर छुपा कौन इतना बेहाल था

दिल की बस्ती कभी रौनक़ थी जिनसे
वीरानगी में भी क्यूँ उन्हीं का सवाल था

बेहाल-ए-हालत इस दिल का इश्क़ कर चुका है
पर दिल को इस बात पर कहाँ कोई मलाल था

सुकून-ए-रूह की तलाश हर वक़्त जारी है
फिर भी दिल मानता कहाँ इश्क़ एक बवाल था


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