बारिश कुछ इस क़दर भिगो गई
हर सामान को ख़ुद में डुबो गई।
चाँद और तारों की तमन्ना कब थी
पर ये आँधी तिनको को भी संग ले गई।
खोमशी का लबों पर हर वक़्त पहर पड़ा है
पर मुस्कुराने की इसकी आदत क्यूँ खो गई।
धूप इस चौखट पर न आएगी कभी
सामने घरों में दीवारें जो खड़ी हो गई।
हाथ अब किसी से मिलाए तो कैसे भला
आखों को सच बोलने की
आदत जो हो गई।
Baarish kuch is kadar bhigo gayi
ReplyDeletezindagi ka path naya sikha gayi
Boond boond se milkar bane dariya
bikhrav se ekatra hone ke laabh bata gayi
बहुत ही सुंदर .. आप भी ब्लॉग पर शुरू हो जाएँ
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