Monday, 23 October 2017

पैरों को चलने के सलीके कैसे समझायें

पैरों को चलने के सलीके कैसे समझायें 
जब राहों ने खुद हर तरफ काटें हैं बिछायें 

जो सिर्फ झूठ के लफ्जों से सजे हो
ऐसे गीत तन्हाई में कैसे गुनगुनायें  

डाली ने खुद को थोड़ा क्या झुकाया 
हर कोई उसके फूल ही तोड़ना चाहे 

कितने दरवाज़े हम रोज़ खोलते 
क्या ज़रूरी सबसे गुज़रते जायें

जो राह हर वक्त चोट पहुचायें 
उस राह पे क्यूँ हम कदम बढ़ायें  



Monday, 16 October 2017

हम सबकी एक कहानी है

हम सबकी एक कहानी है 
हम सब में एक कहानी है 

न इसमें कोई राजा है 
न इसमें कोई रानी है

कोई इसे कैसे कहेगा 
इसे हमें ही सुनानी है  

उस बेबस लाचार की 
बस बात तो बतानी है

मेरी ही ये कहानी है 
ये कहने की ठानी है

न वो बहुत गुलाबी है 
न ही वो आसमानी है

ज़िन्दगी को रोक न पाए  
वो तो बस बहता पानी है 

जो बीत गया वो पल था
जो आगे है ज़िंदगानी है

जब चाहे एक मोड़ दे दे 
बात अपनी तो बतानी है

हम सब की जो कहानी 
हम सब की ही ज़ुबानी है
 


 

   

जी चाहता महसूस करते जी चाहता छोड़ जाते

जी चाहता महसूस करते जी चाहता छोड़ जाते
आँखों की तरह काश दिल को भी बंद कर पाते     

वक्त को वो सच हम कैसे  बतलायें           
जिसे हम खुद से भी अब तक हैं छुपाते

अब हमें सबसे कुछ दुरी ही है पसंद 
अब हम खुद को नहीं तोडना चाहते 

जीवन का सबसे बड़ा सच भी वही है 
जो हम देख कर भी नहीं देखना चाहते  

कभी चाही थी नज़रे इनायत उन्हीं से 
आज उन्हीं के नाम से हम हैं घबराते  

लीजिये वो वक्त भी चलकर आ ही गया 
अब आपके नाम से हम नहीं मुस्कुराते 

दुनिया अब हमे क्यों आवाज लगाए
अब हम एक गहरी नींद सोना चाहते



Saturday, 14 October 2017

मन ने सच कहा मन ने हर झूठ समझाया

मन ने सच कहा मन ने हर झूठ समझाया 
मन की बातों पर वक्त की भी न थी छाया 

झूठ को आज फिर सच कह कर दिखा दिया 
सच को आज फिर हमने वक्त से ही डराया 

सपनों को भी एक सौदागर चाहिए
हकीकत से अब ख्वाब भी घबराया

अश्क हाथों में आकर सूख ही जायेंगे 
ये सोच आँखों को हमने बहुत रुलाया 

देखिये ख़ुशी फिर अँधेरे में ही जा बैठ गई  
और चिराग भी मन का हमने नहीं जलाया

कोई हमारी नफरत के अब काबिल नहीं 
जब से डर अपने मन से हमने है हटाया

मन में गुजरने वालों को हम मन से दुआ दे 
मन के मेहमानों का हमने ऐसे कर्ज़ चुकाया 


   

Friday, 13 October 2017

ज़िन्दगी बस इतना सा तू मुझपे करम कर

ज़िन्दगी बस इतना सा तू मुझपे करम कर 
कुछ भूल जा कुछ न याद दिलाने की रहम कर 

हर सवाल का जवाब खामोशी बने 
इतना भी अब मुझपे तू न सितम कर

टूटी तस्वीरों से दीवारों को सजाएँ 
वक्त पर अब ऐसा भी न जुलम कर

बिखरी हुई भी खुद को समेट ले जाऊँगी 
बस टूटे को और न तोड़ने की तू रहम कर 

ज़ख़्मी हो कर भी ये पैर आगे ही बढ़ते जायेंगे 
अब तेरी मर्जी सर मेरा तू सरेआम कलम कर 





  

Wednesday, 11 October 2017

उम्मीदों से अपनी ज़िन्दगी ज़रूर सजाइये

उम्मीदों से अपनी ज़िन्दगी ज़रूर सजाइये
पर वक्त के साथ कुछ चलते भी जाइये 

उम्मीद अँधेरे आसमान का बस सितारा है 
घर के अँधेरे के लिए एक दीया भी जलाइए 

माना अँधेरे में आप सच के साथ थे 
तो रौशनी को भी हर सच बतलाइये 

उम्मीद कभी भी रूप बदल सकती है 
नाउम्मीदी की कुछ तैयारी भी चाहिए 

ख्वाबों को जी लिया बहुत इस दिल ने  
अब कुछ हकीकत को भी आज़माइये

झूठी उम्मीद से वक्त कटेगा संभलेगा नहीं 
कुछ सच्ची बातों को आप यूँ न झुठलाइये

उम्मीद सच है तो दर्द का भी एक अफ़्साना है
दर्द को आप उम्मीद का हिजाब मत पहनाइए  

Tuesday, 10 October 2017

हर चेहरे ने अपना ज़ख़्म अपना गम बताया है

हर चेहरे ने अपना ज़ख़्म अपना गम बताया है 
किसी ने अश्क किसी ने मुस्कान से छिपाया है 

अपनी ही उम्मीदों से हम इतने घायल हैं
अपनी ही उम्मीदों ने हमें ज़ख्म पहुंचाया है

हम ख़ुद को अब कैसे पहचानेंगे 
वक्त का हम पे भी पड़ा साया है  

दिल कहे कुछ भूल कर मुस्कुराओ
यादों पे तो ग़मों का बादल छाया है

आपने देखिये हमें किस क़दर बदल दिया 
ये अहसान तो आपका हम पर बकाया है 

कुछ ज़ख्मों के साथ ही हमें चलना है  
देर से ही सही अब ये समझ आया है

न दिलदार न बेक़रार न इंतज़ार न इक़रार
ये कौन सा मक़ाम इश्क़ में हमने पाया है 

हम टूटे दिल से भी कहे इश्क़ को शुक्रिया 
उसने हमे अंधेरों में रास्ता तो दिखाया है 

हम खुद से क्यूँ इतने खफा हैं 
हमें भी तो खुदा ने ही बनाया है