Monday, 16 March 2020

नफरतों के इस दौर में मोहब्बत गुनाह है

नफरतों के इस दौर में मोहब्बत गुनाह है
झूठ का ये शहर है यहां सच गुनाह है 

लोग जलते हुए शहर जलता हुआ
पानी यहां पाप है आग बुझाना गुनाह है

गिरते हुए को यहां और गिराया जायेगा 
यहां पैर उठाना माफ़ है हाथ बढ़ाना गुनाह है

दोस्ती भी अब मुखौटों में पाई जाएगी
बुराई ख़ुशी से साथ है पर उसे दिखाना गुनाह है

बेचिये यहां आप सबकुछ बेच पाएंगे
पर आवाज बेआबरू है बाजार सजाना गुनाह है 





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