Wednesday, 27 September 2017

हर किसी का अपना दर्द अपनी ही सजा है

हर किसी का अपना दर्द अपनी ही सजा है 
कोई खुद से खफा कोई हालात से गमज़दा है

कुछ ख्वाहिशों ने भी तोड़ी है हमारी उम्मीदें  
वर्ना अँधेरा कब सुबह के कहने पे रुका है

कुछ रिश्ते खुद-ब-खुद ही टूट जाते 
हर बार गलतियों की नहीं होती खता है

अब दर्द खुद को कुछ गुनगुना चाहता है 
खामोश रहने की इसे मिल चुकी सजा है

अश्क दिल की ही एक आवाज है 
जहन से कहाँ कोई इसका रिश्ता है

न जाने कब कोई तारा सुस्ताना चाहे 
आँगन आज भी हमने खुला ही रखा है  


Monday, 25 September 2017

आईना देख कर हमने रूप संवारा है

आईना देख कर हमने रूप संवारा है 
कैसे माने आईने को हर सच गंवारा है 

आईने को बस चेहरा दिखता है   
दिल आज भी कितना बेसहारा है 

खूबसूरती क्या चेहरे में ही बसी है 
आईने ने तो बस चेहरा ही उभारा है 

आईने को धोखा देने की फिर सोची है 
साजिशों से हमने हर दाग छुपा डाला है

ज़िन्दगी भी कुछ आईने से ही बन गई 
झूठी मुस्कान से चेहरा लगता प्यारा है

आज फिर खुद का सच जानना है 
आज फिर झूठे आईने का सहारा है 




  

अजीब उलझनों में हम खुद को जीये जा रहे हैं

अजीब उलझनों में हम खुद को  जिये जा  रहे हैं 
कभ खुद को भूलना चाहें कभी आवाज लगा रहे है

कभी जी करे खुद से रु-ब-रु हो लें 
कभी खुद को बे-हिसाब सता रहे हैं

बहुत मुश्किल है दिल को सच समझाना 
झूठी बातों से हम दिल का दिल बहला रहे हैं

कैसे हम खुद को उनसे छुपाये 
जो ख्वाबों में आ हमें जगा रहे हैं 

लीजिये हम छोड़ आयें पीछे वो दुनिया 
फिर क्यूँ  कुछ लफ़ज़ हमें चौंका रहे हैं

वो नाम ही क्यूँ जहन में बार बार आये  
जब लोग इश्क़ के तराने गुनगुना रहे हैं    

देखिये आज फिर झूठ जीत के आया 
सच आज भी बस घर से चिल्ला रहे हैं 


हार ने कितना कुछ सिखाया है

हार ने कितना कुछ सिखाया है 
कोशिश ने बहुत कुछ दिखाया है 

ज़िन्दगी जीने को ही मिली है 
हमने इसे सौदेबाज़ी में लगाया है 

अपने हुनर को यूँ ही न गवाँ दो 
खुशकिस्मती से ये सौगात आया है 

ख्वाबों का हकीकत से सौदा कर लो 
ज़िन्दगी ने बड़े प्यार से समझाया है 

बस उम्मीदों से कुछ बदलता नहीं
बेबसी ने हमें आज फिर ये सुनाया है 

इश्क़ से आप इतनी नफरत पाले बैठे हैं  
इश्क़ में किसी ने ताज महल भी बनवाया है

Saturday, 23 September 2017

कुछ दे कर ही कुछ पा रहे हैं

कुछ दे कर ही कुछ पा रहे हैं
आप सौदे से क्यों घबरा रहे है

सौदा ज़िन्दगी की एक हकीकत
सौदे से हम ज़िन्दगी चला रहे हैं 

कोई सौदे का सलीका समझाए उन्हें 
बार बार के सौदे से वो टूटते जा रहे हैं 

अच्छा सौदा ज़िन्दगी संवारेगी 
आप ज़िन्दगी को क्यूँ डरा रहे हैं

सौदे का एक धर्म मुनाफा 
आप अहम से घाटा खा रहे हैं 

अब कुछ निवेश खुद में भी करेंगे
हमारी बात से वो खफा नज़र आ रहे हैं 

हमने तो बस सौदे की बात कही
आप इसमें पैसा क्यों घुसा रहे हैं 

सुकून की चाहता किसे नहीं दुनिया में 
हम भी चैन के लिए सौदा अपना रहे हैं  
  

अजीब सा उस शख्स से रिश्ता है

अजीब सा उस शख्स से रिश्ता है 
जो दर्द दे गया सुकून उसी में दिखता है 

उसकी मुस्कान से दिल मुनव्वर हो 
उसके दर्द में दिल दर्द लिखता है 

खुद को हमने मशरूफियत से संवारा है 
उसका चेहरा पर वक्त से नहीं छिपता है 

अपनी चाहते खुद से भी छिपाई है 
कोई तो बाजार मिले जहाँ ये बिकता है 

अपनी ही नज़रों से नफरत सी होने लगी 
अँधेरे में इन्हें उम्मीद का बादल दिखता है







Friday, 22 September 2017

फासले हमारे दरमियान कभी आ नहीं सकते

फासले हमारे दरमियान कभी आ नहीं सकते 
अलग आसमान अलग चाँद ये बना नहीं सकते 

माना राह में मुश्किलें आयेंगी 
पर मसले हमे डरा नहीं सकते  

कुछ पन्ने ज़िन्दगी की किताब के  
कोई हमसे ज़ोर से पढ़वा नहीं सकते

कुछ इल्म चोट खा कर ही हमने पाई  है 
आप अपनी बातों से हमे फ़ुसला नहीं सकते  

मोहब्बत के हर ज़ुल्म हम खमोशी से इसलिए सह गए 
इश्क़ जिन्हें न सीखा पाया लफ्ज़ उन्हें समझा नहीं सकते

सच पिंजरा तोड़ कर भी बहार आएगा 
झूठ उन्हें बहुत दिनों तक छुपा नहीं सकते