Sunday, 18 March 2018

हमारे मुस्कुराने से ही ये भी मुस्कुराते हैं

हमारे मुस्कुराने से ही ये भी मुस्कुराते हैं
अजनबी की तरह ही वक्त रिश्ता निभाते हैं

माना आंधियां कुछ देर में चली जाएगी
पर इन की बर्बादियों में हम उम्र बिताते हैं

जब जवाब आया तो सवाल खो गया 
और लोग समझते हैं हम यूँ ही मुस्कुराते हैं

एक उम्मीद ही अब तक ज़िंदा रक्खे है
ज़िन्दगी के अच्छे दिन बस अब आते हैं

किसी से शिकायत हमारी अब खो गई
सबसे ज्यादा हम ही तो खुद को सताते हैं

खुदा हर ज़ख्म के दाग मिटा दे
हम भी अब मुस्कुराना चाहते हैं







Saturday, 17 March 2018

बिन बात भी कभी रुठिये-मनाइये

बिन बात भी कभी रुठिये-मनाइये 
बिन मतलब भी कभी हँसिये-हंसाइए

दोस्ती में तकल्लुफ़ शामिल नहीं जनाब
बिन बात दोस्तों  को सताइये-बहलाइये 

सुबह और शाम से बंध गई है ज़िन्दगी 
कभी दिन और रात को भी हंसाइए-रुलाइये 

क्या हुआ जो कुछ ख्वाब फिर टूट गए 
बेधड़क कुछ और भी संवारिये-सजाइये 

ज़िन्दगी से बोरियत जाएगी ज़रूर 
बिन मौके भी दोस्तों को बुलाइये-बिठाइये 

डर कर किसी को कोई बदला है भला 
ज़िन्दगी को कभी आप भी डराइए-धमकाइये

Friday, 16 March 2018

उम्मीद पर ही ये ज़िन्दगी चल रही है

उम्मीद पर ही ये ज़िन्दगी चल रही है 
झूठी-सच्ची उम्मीदें हर दिल में पल रही है

ये सच है हर सपने सच होते नहीं 
पर साथ इसके ज़िन्दगी सुकूं में गुज़र रही है 

चाहत बस कुछ खुशकिस्मत को अपनाती है 
पर चाहत की चाहत दिलों को मसरूर* कर रही है 

शाद* झूठ को सच मान लेने में भी है 
हकीकत तो यूँ ही हर रोज़ किसी को निकल रही है 

ज़िन्दगी जन्म से मौत का बेरंगी नाम है  
बस कुछ ख्वाहिशें ही तो इसमें रंग भर रही है 

मसरूर - आनंदित 
शाद - ख़ुशी 


जो साथ है वो ही तो खास है

जो साथ है वो ही तो खास है 
बाकि बस सब एक एहसास है

ज़िन्दगी रस्तों में कट जाएगी
मंज़िल की अब हमें नहीं आस है

जो टूट गया माना अब वो छूट गया 
वक्त और ज़ज़्बात संजोना बकवास है

हर दिन खुद में ही एक तोहफ़ा है 
एक-एक साँस ज़िन्दगी की सौगात है 

खुदा को कहें तहे दिल से शुक्रिया
हर ज़रूरत की चीज़ हमारे पास है







Thursday, 15 March 2018

कुछ लोग मिल कर भी कब मिल पाते हैं

कुछ लोग मिल कर भी कब मिल पाते हैं
दौड़ते रास्ते कई बार खुद-ब-खुद सिल जाते हैं

अजीब तमाशा बन गई है ये ज़िन्दगी
उम्मीदों के मौसम में नाउम्मीदी के फूल खिल जाते हैं

ज़िन्दगी हंसी ख़ुशी से गुज़रेगी कैसे
हर राह में दुश्मन दोस्त बन के मिल जाते हैं

वो तन्हाई में भी खुश रहता है
ऐसी बातों से हम तो हिल जाते हैं

बहुत गहरे हैं ये ज़ख़्म फरेबी के
मरहम से भी ये अब छिल जाते हैं

   

वक्त कई बात निगल लेता है

वक्त कई बात निगल लेता है
समय हालात बदल देता है

कभी सुबह से उम्मीद लगाई थी
आज हमे अँधेरा सुकून देता है

हर बात में इतनी टोका-टाकी
कोई भला ऐसे भी साथ देता है

किसी की बातों को दोहराने से क्या
गूंज कब असली आवाज़ देता है

कुछ परेशानियां यूँ भी मिट सकती हैं
इंसान बेवजह उसे हालात देता है


   

Monday, 8 January 2018

शाम को सूरज निकलने की आस लिए हैं

शाम को सूरज निकलने की आस लिए हैं अजीब लोग हैं कैसे कैसे विश्वास लिए हैं

वक़्त का भी कुछ अपना मरहम होगा क्यूँ आप मायूसी की बरसात लिए हैं

बुराई-अच्छाई को कैसे समझाएं
ये सब खुद में ही हालात लिए हैं

उम्मीदों को भी कुछ सरहद चाहिए बिन मतलब भी हम कुछ आस लिए हैं

जिसे देखिये नया साल मुबारक बोल रहा
लगता है ये साल कुछ खुद में खास लिए है