शाम को सूरज निकलने की आस लिए हैं
अजीब लोग हैं कैसे कैसे विश्वास लिए हैं
वक़्त का भी कुछ अपना मरहम होगा क्यूँ आप मायूसी की बरसात लिए हैं
बुराई-अच्छाई को कैसे समझाएं
ये सब खुद में ही हालात लिए हैं
उम्मीदों को भी कुछ सरहद चाहिए बिन मतलब भी हम कुछ आस लिए हैं
जिसे देखिये नया साल मुबारक बोल रहा
लगता है ये साल कुछ खुद में खास लिए है
वक़्त का भी कुछ अपना मरहम होगा क्यूँ आप मायूसी की बरसात लिए हैं
बुराई-अच्छाई को कैसे समझाएं
ये सब खुद में ही हालात लिए हैं
उम्मीदों को भी कुछ सरहद चाहिए बिन मतलब भी हम कुछ आस लिए हैं
जिसे देखिये नया साल मुबारक बोल रहा
लगता है ये साल कुछ खुद में खास लिए है
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