Monday, 8 January 2018

शाम को सूरज निकलने की आस लिए हैं

शाम को सूरज निकलने की आस लिए हैं अजीब लोग हैं कैसे कैसे विश्वास लिए हैं

वक़्त का भी कुछ अपना मरहम होगा क्यूँ आप मायूसी की बरसात लिए हैं

बुराई-अच्छाई को कैसे समझाएं
ये सब खुद में ही हालात लिए हैं

उम्मीदों को भी कुछ सरहद चाहिए बिन मतलब भी हम कुछ आस लिए हैं

जिसे देखिये नया साल मुबारक बोल रहा
लगता है ये साल कुछ खुद में खास लिए है




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