Wednesday, 16 May 2018

ये मौसम ही है गुज़र जायेगा

ये मौसम ही है गुज़र जायेगा
वक्त फिर बदल के आएगा

काटों से आप क्यों इतना खौफ खाये
बिन इन्हें छुए फूल कैसे कोई पायेगा

ज़िन्दगी को इतना भी ना सताइये
दिल के मेहमाँ को दिल कैसे भूल जायेगा

बहुत मुश्किल है गम में खुद को हँसाना
पर ये ज़िन्दगी को कुछ तो गुदगुदाएगा

तन्हाई में खुद की रिहाई छुपी है
खुद के जैसा कौन हमें समझयेगा   

3 comments:

  1. Phool aur Kante in lifes #Journey

    ReplyDelete
  2. हंसना हसाना जिवन में
    काम है मेरा
    चाहे तूं अगर कोंइ और
    फर्क न है कोंई
    काम मेरा हंसगूल्ले बांटना
    बांटता था,रहुंगा
    हंसना हसाना काम है मेरा
    हसके बात मानलो

    ReplyDelete