Tuesday, 1 May 2018

वक्त कितना कुछ सिखला देता है

वक्त कितना कुछ सिखला देता है 
आंसुओं को गर न छुपा सके 
तो ये हंसी बहाने बना देता है  

दुःख बिछड़ने का है बड़ा  
पर कुछ लोगों का साथ 
ज़िन्दगी को ही रुला देता है

यादें ज़िन्दगी को तड़पाती है 
पर सच सच है ये बात दिल 
खुद को कुछ समझा देता है

दो दिन की है ज़िन्दगी
इस दो दिन के लिए इंसान 
कितना खुद को सजा लेता है 

किसी के साथ कोई मरता है कहाँ 
इश्क़ भी देखिये न, ना जाने 
क्या क्या भरम फैला देता है

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