फिर मौसम बदला सा फिर आंख भर आई है
कैसे कैसे याद सिमटे ये रात अँधेरी छाई है
दर्द भी अब कुछ कुछ बदला बदला लगता है
उल्फत नफरत यादें बातें सबमें इसकी परछाई है
हाल -ए-दिल किसी को अब सुनाएँ कैसे
इसके हर कोने में मोहब्बत की रुसवाई है
इस तिल के भी कितने सारे अफ़साने है
चेहरे पे बैठा मद-मस्त ये एक तमाशाई है
मोहब्बत भी हर दिल में रूप बदलती जाती है
कहीं इबादत कहीं ये चाहत कहीं ये मसीहाई है
कैसे कैसे याद सिमटे ये रात अँधेरी छाई है
दर्द भी अब कुछ कुछ बदला बदला लगता है
उल्फत नफरत यादें बातें सबमें इसकी परछाई है
हाल -ए-दिल किसी को अब सुनाएँ कैसे
इसके हर कोने में मोहब्बत की रुसवाई है
इस तिल के भी कितने सारे अफ़साने है
चेहरे पे बैठा मद-मस्त ये एक तमाशाई है
मोहब्बत भी हर दिल में रूप बदलती जाती है
कहीं इबादत कहीं ये चाहत कहीं ये मसीहाई है
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