Wednesday, 16 May 2018

आँखें बंद कर ली हमने न देखना चाहते हैं

आँखें बंद कर ली जब न देखना चाहते हैं
दिल को कैसे बंद करे ये बस फरमाते हैं

हर सुबह तारों को खो दिया हमने
हर शाम तारों की उम्मीद जगाते हैं

कोई किसी पे यकीन करे तो कैसे
फूल चाहने वाले उसे तोड़ ले जाते हैं

रात को बदनाम किया हम सब ने
अँधेरा सुकून-आराम भी तो लाते हैं

बस्तियों को लोगों ने बेज़ार किया
अब बच्चें बरसात में कहाँ नहाते हैं

  

1 comment:

  1. Still people love to ‘ walk ‘ in the rain ! In places where I stay

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