यादें जिनकी दिल को दुखाती है
मोहब्बत ऐसे भी रिश्ते निभाती है
वक्त न मालूम और क्या लाएगा
अभी तो रौशनी आँखों को डराती है
दुश्मनों को भी अब एहतिराम करते हैं
दुश्मनों को भी अब एहतिराम करते हैं
जब से जाना दोस्ती खुद को बिकवाती है
हुनर कितना भी खुद में सजा लीजिये
ज़िन्दगी किस्मत से कुछ लिखवाती है
मिट्टी की है फितरत वफ़ा निभाने की
पर कई बार वो खुद प्यासी रह जाती है
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