ज़िंदगी मुस्कुराना सिखा देती है
मज़बूरियां हालात समझा देती है
हर कोई अंधेरे की बात करते हैं
रौशनी ख़ुद को समझा लेती है
कितना भी वो बात छिपाए
ख़ामोशी कुछ बता ही देती है
वो हर वक़्त ध्यान हम पे रखना
दुश्मनी कुछ दोस्ती निभा लेती है
वो ख़फ़ा हैं ख़फ़ा रहे हमसे
ज़रूरतें कुछ दीवार गिरा देती है
क्या ख़ूब लिखते है आप मैडम जी !
ReplyDeleteshukriya sir ji
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