हर वक़्त कुछ खोजता हूँ खोया नहीं हूँ मैं
मुसाफ़िर हूँ बस कई रातों से सोया नहीं हूँ मैं
सफ़र के यादों के सौदे से
ख़ुद को भर लिया
मंज़िल को छोड़ कर जाते
हुए रोया नहीं हूँ मैं
ख़ुद को पाने के लिए
ख़ुद को खोने को तैयार
किसी दूसरी चाहत से
ख़ुद को भिगोया नहीं हूँ मैं
क़िस्सों कहानियों का
ख़ज़ाना है मेरे पास
सामानों के बोझ तले
ख़ुद को ढोया नहीं हूँ
ज़िंदगी रही तो फिर
किसी राह पे मिलेंगे
मुसाफ़िर हूँ मंज़िल को
देख खोया नहीं हूँ मैं
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