हमसफ़र कभी खुद को भी बना लीजिये
रास्तों पे भी मंजिल का मज़ा लीजिये
दुनिया के खातिर कब तक यूँ सजेंगे
आईने के लिए भी खुद को सज़ा लीजिये
सूरज को अब हम भी पहचाने हैं जनाब
सैकड़ों दीपक आप चाहे जला लीजिये
इश्क़ वक्त के साथ खुद को बदलता बहुत है
रूहानी बातों से बस खुद को बहला लीजिये
टूट कर कोई शीशा जुड़ता है कहाँ
हो सके तो खुद को ये समझा लीजिये
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