Monday, 17 December 2018

मत आस लगाना

इक शब्द हूँ कविता बन जाऊँ कैसे इक बूँद हूँ प्यास मिटाऊँ कैसे इक धूप हूँ सूरज को लाऊँ कैसे इक पत्ता हूँ पेड़ बन बहलाऊँ कैसे बहुत मुश्किल है एक को भूल जाना पर एक से पूर्णता की भी मत आस लगाना

1 comment:

  1. सही कहा -एक पूर्ण नहीं हो सकता, आदर्श भी नहीं हो सकता| बस ये अहसास ही हमारे खालीपन को भरने में सक्षम है|

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