हर पत्थर में एक आग होती है
हर आवाज़ में एक बात होती है
अँधियों में जो खिड़कियों की धड़कन है
वो बेबसी बेकरारी के साथ होती है
अपनी बेकरारी को हम कैसे पहचाने
लगता है किसी की हमसे बात होती है
कुछ तो गलत किया है हमने
बेकरारी यूँ ही नहीं पास होती है
कुछ पाने की चाहत या टूटने का सिला
बेकरारी हर हाल में आबाद होती है
हर आवाज़ में एक बात होती है
अँधियों में जो खिड़कियों की धड़कन है
वो बेबसी बेकरारी के साथ होती है
अपनी बेकरारी को हम कैसे पहचाने
लगता है किसी की हमसे बात होती है
कुछ तो गलत किया है हमने
बेकरारी यूँ ही नहीं पास होती है
कुछ पाने की चाहत या टूटने का सिला
बेकरारी हर हाल में आबाद होती है
Good one
ReplyDelete