इंसान है हम हँसे हैं तो रोये भी तो हैं
दर्द में चीखे हैं दर्द में सोये भी तो हैं
ज़िन्दगी को कभी गले से हमने लगाया
ज़िन्दगी के बोझ को कभी ढोये भी तो हैं
कभी खुद को हमने खुद ही है सताया
कभी खुद की चाहत में खुद खोये भी तो हैं
ख्वाहिशें हैं बे-इंतिहा, सपने आसमान के
पर ज़िन्दगी में हकीकत के बीज बोये भी तो हैं
अपनी ही ज़िन्दगी में आग हमने है लगाई
अपनी ही लाश को हम ढोये भी तो हैं
दर्द में चीखे हैं दर्द में सोये भी तो हैं
ज़िन्दगी को कभी गले से हमने लगाया
ज़िन्दगी के बोझ को कभी ढोये भी तो हैं
कभी खुद को हमने खुद ही है सताया
कभी खुद की चाहत में खुद खोये भी तो हैं
ख्वाहिशें हैं बे-इंतिहा, सपने आसमान के
पर ज़िन्दगी में हकीकत के बीज बोये भी तो हैं
अपनी ही ज़िन्दगी में आग हमने है लगाई
अपनी ही लाश को हम ढोये भी तो हैं
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