घरों की बातें महफ़िल में सुनाई नहीं जाती
हर बात लोगों को सरे आम बताई नहीं जाती
मकान बना कर भी हमने देख लिया
घर ईंट-पत्थरों से बसाई नहीं जाती
जाते हुए न मूड के देखा उसने एक बार
और हमसे एक निशानी हटाई नहीं जाती
चलिए अब ज़िंदगी को एक नया मोड़ दे
ज़िंदगी ख़्वाबों-ख़यालों से बिताई नहीं जाती
बहुत हुए जीने के वो किताबी फ़लसफ़े
किताबी बोझ ज़िंदगी से उठाई नहीं जाती
हर बात लोगों को सरे आम बताई नहीं जाती
मकान बना कर भी हमने देख लिया
घर ईंट-पत्थरों से बसाई नहीं जाती
जाते हुए न मूड के देखा उसने एक बार
और हमसे एक निशानी हटाई नहीं जाती
चलिए अब ज़िंदगी को एक नया मोड़ दे
ज़िंदगी ख़्वाबों-ख़यालों से बिताई नहीं जाती
बहुत हुए जीने के वो किताबी फ़लसफ़े
किताबी बोझ ज़िंदगी से उठाई नहीं जाती
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