बस एक लफ़्ज़ से कहानी
उलझ गई
इश्क़ के नाम से
जिंदागानी उलझ गई
सोच से किसी को कहाँ कुछ
हासिल हुआ
पर इस सोच से अब
परेशानी उलझ गई
ग़लतियों ने हर बार
प्यार से समझाया हमें
पर इक ग़लती से मेरी
शैतानी उलझ गई
किस काम का ये जश्न और
ये जुनून
जश्न-ए-शाम से गर जवानी
उलझ गई
आवाज़ों की दुनिया में
सन्नाटे की चाहत थी
पर दिल की ख़ामोशी
से वीरानी उलझ गई
हार से ज़िंदगी सबकी आज
भी नाशाद है
जीत से लेकिन हमारी
पशेमानी उलझ गई
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