ख़्वाबों -ख़यालों की गर बात है तो बात बहुत हैं
कहानियों के साथ तो ज़िंदगी में जज़्बात बहुत हैं
उम्मीद से आप क्यूँ इतनी उम्मीद लगाये बैठें हैं
वो एक पल में बदल जाएगी उसके ताल्लुकात बहुत हैं
हर सवाल का जवाब ख़ामोशी हो सकती नहीं
अब कैसे बताएँ खमोशी के भी फ़साद बहुत हैं
लफ़्ज़ सील लिए तो आँसू बोल पड़े
न कही बातों के पास आवाज़ बहुत है
ज़ख़्म जिस्म का भर गया दिल का भरता नहीं
क्या करे इस दिल के मुआमलात बहुत हैं
किसी की बातों का हम पे असर होता नहीं
हमें अपने आप पर आज भी विश्वास बहुत है
कहानियों के साथ तो ज़िंदगी में जज़्बात बहुत हैं
उम्मीद से आप क्यूँ इतनी उम्मीद लगाये बैठें हैं
वो एक पल में बदल जाएगी उसके ताल्लुकात बहुत हैं
हर सवाल का जवाब ख़ामोशी हो सकती नहीं
अब कैसे बताएँ खमोशी के भी फ़साद बहुत हैं
लफ़्ज़ सील लिए तो आँसू बोल पड़े
न कही बातों के पास आवाज़ बहुत है
ज़ख़्म जिस्म का भर गया दिल का भरता नहीं
क्या करे इस दिल के मुआमलात बहुत हैं
किसी की बातों का हम पे असर होता नहीं
हमें अपने आप पर आज भी विश्वास बहुत है
Looks you know Urdu words in plenty . Btw , have you ever read some one ' story ' in shape of a Book ! ��������
ReplyDeleteI am lost most of the time when it comes to Urdu .. but trying to learn .. and I am a complete illiterate person when it comes to reading books.. 😰😰😰
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