Monday, 8 January 2018

तोहफ़ा नहीं व्यवहार बोलता है

तोहफ़ा नहीं व्यवहार बोलता है पैसा नहीं सदाचार बोलता है बेशक़ीमती सामान ख़रीद के देख लिया मुफ़्त में पाया छोटा सा उपहार बोलता है उम्मीदों के कुछ तोहफ़े हम भी चाहें क़िस्मत का मारा वो लाचार बोलता है

हर दिन ख़ुद में ही एक तोहफ़ा है
ख़ूनी ख़बर वाला अख़बार बोलता है

हम मर कर भी अब तक कैसे जिन्दा है
शायद बुजुर्गों की दुआओं का संसार बोलता है

वक्त ने क़त्ल किया वो कातिल कहलायेगा
टी वी का मारा हर समाचार बोलता है

बस हाथ बढ़ाने का ही तो फासला था
गलतफहमी में खड़ा दीवार बोलता है

कितना तुम मुझ को दे पाओगे
बाजार का हर खरीदार बोलता है

खुशियां इस पल में ही बसी है
दिल में बजता तार बोलता है






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