Tuesday, 20 September 2016

परिवर्तन सृष्टि का नियम है

परिवर्तन सृष्टि का नियम है
सृष्टि में हर चीज बदलती है
कुछ तेजी से इस बदलाव को पकड़ती हैं
कुछ धीरे धीरे नए रूप में ढलती है

पतझड़ में पेडो पर उदासी छा जाती है
पर वसंत इसमें खूब हरियाली लाएगी
इस बदलाव के  नए पत्तों से  
पेड़ों पर हरियाली लहलहाएगी

अगर सुबह है तो शाम भी होगा
और शाम के बाद अंधेरा भी छाएगा
पर अंधेरा जाते हुए 
सुबह की लालिमा दे कर जाएगा

कितनी भी तपती गर्मी हो
वो शाम को देकर ही जाएगी
साथ अपने वो कुछ गरम किरणें भी  
समेट के लेकर ही जाएगी

सृष्टि के हिसाब से हमें भी चलना है
हमें भी माहौल के अनिरूप बदलना है
हाँ हमें भी अपने आराम के घर से 
बदलाव के लिए बाहर निकलना है

अगर दिल में अंधेरा है तो ये परिवर्तन उजाला दे जाएगा
और अगर उजाले से आंखें चौन्धिया गई है
तो अंधेरा आंखों को थोड़ा आराम पहुचाएगा
ये परिवर्तन ही हमें नई राह दिखलाएगा

हम फिर क्यों परिवर्तन से घबराते हैं 
हम क्यों दूसरों में ही बदलाव चाहते हैं 
बदलाव तो हमें अपने में ही लाना है
अगर हमें अपने आस पास को जगमगाना है


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