नसीहतों का क्या करें
कैसे इससे निजात पायें
इसे कहाँ लेकर जायें
जी चाहता है कुछ और
नहीं तो
नसीहतों का एक पुलिंदा
बनायें
हर एक नसीहत इसमें
सम्भालें
सयानों नादानों बईमानों
दिवानों
सबकी नसीहत इसमें बंध
जाए
एक भी बाहर न बच पाए
बोझ भारी होगा पर उठा
लेंगें
किसी की नसीहत के बिना
ही
इसे घर से बाहर
निकालेंगे
दूर बहुत दूर इसे छोड़
कर आएँगें
कोई वापस फिर न कभी आ
पाये
किसी शक्ल में भी हमें
न सता पाये
थक गए हैं हम जो आता है
साथ एक नसीहत ज़रूर
लाता है
हमारे सूरत-ए-हाल से
गुज़रे बिना
बिन माँगे एक नसीहत दे
जाता है
नसीहतों से अब ज़िंदगी
नहीं हम जोड़ना चाहते हैं
अपनी ज़िंदगी अपनी
अक़्ल पर छोड़ना चाहते हैं
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